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Showing posts from August, 2024

Shiv Panchakshar Stotra

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय  भस्माङ्गरागाय महेश्वराय | नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय  तस्मै नकाराय नमः शिवाय || 1 || मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय  नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय | मंडन गिरीशान मुनिसंमिताय  तस्मै मकाराय नमः शिवाय || 2 || शिवाय गौरीवदनाब्जरुचिताय  नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय | सदाशिवाय च नन्दीश्वराय  तस्मै शिकाराय नमः शिवाय || 3 || नानामय तडिताय शिवार्चिताय  नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय | सर्वेषां शाश्वत सदा शिवाय  तस्मै वकाराय नमः शिवाय || 4 || मुक्तिप्रदाय कपालि महेश्वराय  नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय | सर्वशक्तिमयो महेश्वराय  तस्मै यकाराय नमः शिवाय || 5 || Translation Salutations to the One who wears serpents (Nagendra), to the three-eyed one (Trilochana), to the One smeared with ashes (Bhasmanga), to the great Lord (Maheshwara). Salutations to the One who is adorned with the holy river Mandakini, to the One who is the lord of Nandi, and to the great Lord (Maheshwara). Salutations to the One whose face is like the lotus, to th...

Krishna-shiv

  सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं सरणं व्रज | अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा sucah || Translation: "Abandon all varieties of religion and just surrender unto Me. I shall deliver you from all sinful reactions. Do not fear." श्रीकृष्णाय च शिवाय च नमः सदा भक्ति युक्ताय च शम्भवे। सदा कृष्णाय च शिवाय च नमः शंकराय हराय च नमः॥ Translation: "Salutations to Lord Krishna and Lord Shiva, who are always devoted. Salutations to Shambhu (Shiva) and Hari (Krishna)." नमः शिवाय च शिवाय च नमः कृष्णाय च कृष्णाय च। शंकराय हराय च नमः कृष्णाय च हराय च॥ Translation: "Salutations to Shiva and Krishna, to Shankar (Shiva) and Hari (Krishna)."

Shloka - 1

  गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः। गुरु साक्षात् परम ब्रह्मा तस्मै श्री गुरवे नमः॥ अर्थ : गुरु ब्रह्मा (सृष्टि के रचयिता), गुरु विष्णु (सृष्टि के पालक), और गुरु महेश्वर (सृष्टि के संहारक) हैं। गुरु स्वयं परम ब्रह्मा हैं, उन्हें मेरा प्रणाम। विद्या ददाति विनयं विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धानमाप्नोति धानाद्धर्मं ततः सुखम्॥ अर्थ : विद्या विनय (नम्रता) देती है, विनय से पात्रता प्राप्त होती है। पात्रता से धन प्राप्त होता है, और धन से धर्म और सुख प्राप्त होता है। मातृ देवो भव मातृ देवो भव पितृ देवो भव। आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव॥ अर्थ : माता को देवता मानो, पिता को देवता मानो। गुरु को देवता मानो, अतिथि को देवता मानो। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत। अर्थ : सभी लोग शुभ देखे, कोई भी दुःख का भागी न बने। सप्तरश्मि सुतां प्राप्य सप्ताश्वरथिता वाणी कनककूटका रत्नम्। अर्थ : सप्ताश्वरथिता (सप्त रथों द्वारा परिवहन) और कनककूट (स्वर्ण की छांव) से प्राप्त रत्न के समान। ये श्लोक जीवन की महत्वपूर्ण शि...